समर्थन मूल्य खरीद की आड़ में100% ‘पंजीकरण घोटाला’: किसान क्यों हो रहा है बेबस?

समर्थन मूल्य खरीद का सार और पंजीकरण घोटाला में ‘राजफैड’ की भूमिका
भारत में कृषि एक मूलभूत स्तम्भ है और किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) की व्यवस्था लागू करती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फसल की बम्पर पैदावार या बाजार की अनिश्चितताओं के दौरान भी किसानों को उनकी उपज का एक उचित मूल्य मिल सके।
राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्य में, राज्य सहकारी विपणन संघ यानी राजफैड (RAJFED) वह नोडल एजेंसी है जो विभिन्न फसलों (जैसे मूंग, मूंगफली, सरसों, चना, उड़द आदि) की खरीद MSP पर करती है।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों से, समर्थन मूल्य खरीद पवित्र उद्देश्य एक संगठित ‘पंजीकरण घोटाला’ की भेंट चढ़ रहा है। यह घोटाला किसानों के वास्तविक लाभ को बिचौलियों और मुनाफाखोरों के हाथों में सौंप रहा है, जिससे सरकारी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं और सबसे बड़ा नुकसान उस छोटे और सीमांत किसान का हो रहा है, जिसके लिए यह योजना बनी है।

यह लेख समर्थन मूल्य खरीद घोटाले के स्वरूप, इसके कारणों, प्रभावों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) पर केंद्रित ठोस समाधानों पर विस्तार से प्रकाश डालता है, ताकि सरकार और प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित किया जा सके और किसानों के लिए वास्तविक लाभ सुनिश्चित हो।
- समर्थन मूल्य खरीद पंजीकरण घोटाला:
पर्दे के पीछे का खेल और वर्तमान प्रक्रिया की विफलता
समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए किसानों को राजफैड के पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना अनिवार्य होता है। यह पंजीकरण वर्तमान में मुख्य रूप से ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से किया जाता है, और यहीं से घोटाले की जड़ें शुरू होती हैं।
समर्थन मूल्य खरीद वर्तमान प्रक्रिया की विफलता के मुख्य बिंदु:
फर्जी गिरदावरी (फसल की गलत एंट्री):
यह घोटाले का सबसे बड़ा आधार है। मुनाफाखोर या बिचौलिए स्थानीय राजस्व अधिकारियों और ई-मित्र संचालकों से साठगाँठ करके ऐसे लोगों के नाम से फर्जी गिरदावरी बनवाते हैं, जिनके पास वास्तव में वह फसल नहीं होती। इससे ‘कागजी फसल’ का कोटा बढ़ जाता है।

ई-मित्र/दलालों की मिलीभगत और OTP का दुरुपयोग:
अनपढ़ और गरीब किसान ई-मित्र के जाल में फंसने से डरता है। ई-मित्र पर पंजीकरण की अनिवार्यता ने बिचौलियों के लिए एक ‘फिशिंग नेट’ का काम किया है। किसान की जानकारी का उपयोग करके, या तो किसान के नाम पर फर्जी पंजीकरण कर दिया जाता है, या उसे बरगलाकर उसकी उपज बेचने की क्षमता (खरीद सीमा) को दलाल अपने नाम करवा लेते हैं।
‘पहले आओ, पहले पाओ’ की दोषपूर्ण नीति:
वर्तमान में समर्थन मूल्य खरीद के लिए टोकन जारी करने में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति अपनाई जाती है। यह नीति गरीब और कम पढ़े-लिखे किसान को नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि टोकन कटवाने की जानकारी और संसाधन सबसे पहले दलालों और बड़े किसानों के पास उपलब्ध होते हैं, जिससे वे प्राथमिकता के आधार पर पंजीकरण करवाकर कोटा ब्लॉक कर देते हैं।
- वास्तविक किसानों के लिए सीधी समर्थन मूल्य खरीद: FPO-आधारित समाधान
घोटाले को खत्म करने और MSP का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचाने का एकमात्र तरीका यह है कि पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी किसान-केंद्रित संस्थाओं के हाथों में सौंपा जाए, जैसे कि किसान उत्पादक संगठन (FPO)।
FPO के माध्यम से खरीद की नई व्यवस्था:
(अ) राजफैड का हस्तक्षेप कम हो, FPO की भागीदारी बढ़े:
FPO-केन्द्रित खरीद कोटा:
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लघु कृषक कृषि-व्यवसाय कंसोर्टियम (SFAC) को राजफैड की जगह नोडल खरीद एजेंसी बनाया जाना चाहिए। SFAC को FPO के माध्यम से सीधे खरीद का एक अलग कोटा (हिस्सा) आवंटित करना चाहिए।

FPO द्वारा पंजीकरण की जिम्मेदारी:
ई-मित्र पर किसानों का पंजीकरण पूरी तरह बंद होना चाहिए। इसके बजाय, पंजीकरण की पूरी जिम्मेदारी FPO को दी जानी चाहिए।
कारण: FPO संस्था किसानों की होती है। FPO के सदस्य होने के नाते, उन्हें गांव और खेती की फसल की पूरी जानकारी होती है। वे जानते हैं कि कौन सदस्य है, कौन गैर-सदस्य छोटा या सीमांत किसान है और किसके पास वास्तव में कितनी उपज है।
पंजीकरण में पारदर्शिता: FPO अपने सदस्यों (और गैर-सदस्य छोटे व सीमांत किसानों) का एक प्रमाणित डेटाबेस रखेगा, जिससे बिचौलियों और दलालों की पहुँच कमजोर पड़ जाएगी।
(ब) ‘खेत से खरीद’ (Farm Gate Procurement) और ‘कोटा आधारित’ खरीद:
समूहों के लिए अलग कोटा: FPO को उनके सदस्य और गैर-सदस्य छोटे एवं सीमांत किसानों के समूह के लिए एक निश्चित उपज का अलग से कोटा (हिस्सा) मिलना चाहिए।
FPO से सीधी खरीद:
MSP पर खरीद सीधे FPO के माध्यम से होनी चाहिए। FPO खरीद को अपने संग्रहण केंद्रों पर या सीधे खेत से खरीद करवा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में FPO के सदस्य और किसान जनता के सामने होते हैं, जिससे घोटाला हो पाना असम्भव है।
‘पहले आओ, पहले पाओ’ में सुधार:
पुरानी नीति में सुधार करते हुए, छोटे और सीमांत किसानों की उपज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। FPO अपने सदस्यों के बीच उपज की मात्रा के अनुपात में या लॉटरी सिस्टम के माध्यम से खरीद की तारीख आवंटित कर सकता है, जिससे सभी को समान अवसर मिलेगा।
- वास्तविक किसानों का पंजीकरण:
सही समर्थन मूल्य खरीद की प्रथम सीढ़ी
यह समझना महत्वपूर्ण है कि वास्तविक किसानों का पंजीकरण ही सही खरीद की प्रथम सीढ़ी है। यदि पंजीकरण ही गलत हो गया, तो बाकी की पूरी प्रक्रिया निरर्थक हो जाती है।
वर्तमान दोषपूर्ण व्यवस्था (ई-मित्र/राजफैड) प्रस्तावित पारदर्शी व्यवस्था (FPO)
पंजीकरण:
ई-मित्र/राजफैड पर। दलालों और बिचौलियों का आसान हस्तक्षेप। पंजीकरण: FPO द्वारा। केवल वास्तविक सदस्य और सीमांत किसान ही पंजीकृत।
सत्यापन:
पटवारी/राजस्व विभाग द्वारा, जो अक्सर कमजोर होता है। सत्यापन: FPO के निदेशक मंडल (जो स्वयं किसान हैं) द्वारा, जिन्हें गांव की पूरी जानकारी होती है।
खरीद नीति: ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (दलालों को लाभ)।
खरीद नीति: छोटे किसानों की उपज को प्राथमिकता/आनुपातिक कोटा (सभी किसानों को समान अवसर)।
भुगतान: राजफैड/सहकारी समिति के माध्यम से (देरी और जटिलता)। भुगतान: SFAC/FPO द्वारा (सीधा, त्वरित और पारदर्शी)।
- प्रशासनिक अनिवार्यता और FPO की भूमिका का विस्तार
सरकार को चाहिए कि वह FPO को केवल ‘समूह’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘MSP खरीद’ में एक अनिवार्य भागीदार के रूप में देखे।
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कठोर कार्रवाई की चेतावनी:
फर्जी पंजीकरण, फर्जी गिरदावरी और दलाली में शामिल पाए जाने वाले किसी भी ई-मित्र संचालक, राजस्व अधिकारी या राजफैड कर्मचारी के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई और सार्वजनिक ब्लैकलिस्टिंग सुनिश्चित की जाए।
टेक्नोलॉजी का उपयोग:
खरीद प्रक्रिया में FPO द्वारा Geotagging और फसल कटाई प्रयोग (CCE) के डेटा का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
FPO को संसाधन: FPO को MSP खरीद और भंडारण के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना (जैसे गोदाम, वजन मशीन आदि) के लिए सरकार द्वारा विशेष अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान की जाए।

निष्कर्ष:
किसान के हक की लड़ाई
समर्थन मूल्य खरीद का उद्देश्य किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, न कि मुनाफाखोरों के लिए कमाई का जरिया बनना। राजफैड पंजीकरण घोटाला इस उद्देश्य को विफल कर रहा है।
हमारा किसान उत्पादक संगठन यह मांग करता है कि MSP खरीद व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव किए जाएं। राजफैड का हस्तक्षेप कम हो, और FPO को खरीद प्रक्रिया की धुरी बनाया जाए। FPO के माध्यम से खरीद, ‘खेत से खरीद’ के सिद्धांत को बढ़ावा देगी, बिचौलियों की पहुँच को समाप्त करेगी और वास्तविक किसान को उसका पूरा हक दिलाएगी।
FPO के माध्यम से समर्थन मूल्य खरीद, किसान की उन्नति का वास्तविक मार्ग है।